तेरे संग वह बारिशे, जैसे कोई इत्र सा,
तेरे संग वह धूप, जैसे कोई बसंत सा ।
राहों में जब हो तुम, राहे फिर मंजिल सा,
तेरे संग चार कदम, जैसे कोई धाम सा ।।
-MS